लेनटेन ऋतु का आध्यात्मिक महत्व

✝ लेनटेन ऋतु का आध्यात्मिक महत्व क्या है ✝
च्चा ईश्वरीय ज्ञान, केवल परमपिता परमात्मा शिव द्वारा पुरुषोत्तम संगमायुग में ही रहस्योदघाटित करते हैं। वही सर्व आत्माओं के परमपिता हैं. इसी समय अर्थात कलयुग रूपी रात्रि के अंत और सतयुग रूपी दिन के संगमयुग पर, वे अपने परमधाम से अवतरित होकर देह-अभिमान के कारण हम आत्माओं में व्याप्त विकारों और अज्ञान के अंधकार को दूर कर, इस भारत भूमि को पुनः स्वर्ग अथवा जन्नत अथवा बैकुंठ बनाने का श्रेष्ठ कार्य कर रहे हैं। वही हम आत्माओं को सही और गलत की, सत्य और असत्य की यथार्थ समझ प्रदान करते हैं। हम आत्माएँ जो अपनी और परमात्मा की पहचान को भूल चुकी हैं, वह आकर हमे आत्मा, परमात्मा और सृष्टि के आदि, मध्य, अंत के साथ-2 कर्मों की गुह्य गति का ज्ञान देते हैं और हमें श्रेष्ठ कर्म करना सिखलाते हैं. चूंकि वे निराकार हैं इसलिए वह एक साधारण वृद्ध और अनुभवी तन, जिन्हें वह ब्रह्मा नाम देते हैं, का आधार लेकर हमें राजयोग का ज्ञान देकर हमारी मनुष्य से देवता बनाते हैं। प्रजापिता ब्रह्मा के द्वारा ही वह हम बच्चों को भी एडॉप्ट करते हैं और ब्राह्मण धर्म की स्थापना करते हैं। 
इसके अलावा वह विभिन्न धर्मों के प्रमुख त्योहारों के आध्यात्मिक रहस्य को भी रहस्योदघाटित करते हैं। इस ईश्वरीय ज्ञान के अनुसार, लेनटेन ऋतु इस बात का द्योतक है कि वर्तमान समय, देह-अभिमान के कारण हम आत्माएँ पतित बन चुकी हैं। 
 

 
अतः, 
परमात्मा जो की सदा पावन हैं और पवित्रता के सागर हैं और कल्याणकारी हैं, हमें ‘पवित्र बनो और योगी बनो’ की श्रेष्ठ मत देते हैं. वह हमें बताते हैं कि अब इस मृत्यु लोक में हमारा यह अन्तिम जन्म है, इसलिए अब हमें देह और देह की दुनिया, में रहते हुए, इनसे निमित्त मात्र संबंध निभाते हुए एक परमपिता परमात्मा शिव को ही याद कर पावन बनना है। 


ईश्वरीय ज्ञान के अनुसार, उपवास का आध्यात्मिक महत्व मन, वचन, कर्म, संबंध-संपर्क सहित संपूर्ण पवित्र रहना है. और काम-काज करते परमात्मा को याद करके पावन निर्विकारी बनना है। यद्यपि लेनटेन काल को सिर्फ 40 दिनों तक ही मनाया जाता है, किन्तु परमपिता परमात्मा शिव के मार्गदर्शन में अब हमें इस पुरुषोत्तम युग में प्रतिक्षण पवित्रता की दृढ़ प्रतिज्ञा करनी है और उसका पालन करना है। इस उत्सव को यथार्थ रीति से मनाने से हम आत्माएँ पुनः अपने वास्तविक गुणों और शक्तियों से भरपूर हो जाएंगी और 21 जन्मों के लिए स्वर्ग का राज्य-भाग्य के मालिक बन जाएंगी। 


तो आइए, परमात्मा शिव द्वारा सिखाए जा रहे श्रेष्ठ ज्ञान को धारण कर श्रेष्ठ बनें और श्रेष्ठ कर्म करें। एक ओर गुड फ्राइडे वर्तमान समय पर परमात्मा द्वारा सिखाए जा रहे राजयोग के आधार पर हमारा उनकी याद की यात्रा पर एकाग्र होने और इस पुरानी दुनिया से जीतेजी मरने का यादगार है, वहीं दूसरी ओर ईस्टर का पर्व, परमात्मा द्वारा हम आत्माओं अर्थात रूहों को वापिस अपने घर शांतिधाम लेकर जाने और उनके द्वारा वर्तमान समय में सिखाए जा रहे राजयोग के आधार पर पुरुषार्थ के द्वारा शीघ्र ही आने वाले स्वर्ग का मालिक बनने का भी यादगार है। आप सभी को गुड फ्राइडे और ईस्टर के शुभ अवसर की हार्दिक शुभ कामनाएँ।

 ओम शान्ति 
 

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