आज का पुरुषार्थ 6 May 2019

(Today Purusharth)

6 May 2019

|Brahma Kumaris

Read and hear Aaj Ka Purusharth in Hindi from Peace of Mind TV channel for 6 May 2019. Watch PMTV Live.

Topic: ‘Lagan aur Magan ke Antar – Attention’ (Give FULL attention to Yog)

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बाबा कहते हैं … 
बच्चे अपना 100% दे पुरुषार्थ कर रहे हैं। 

• सबके अंदर एक ही लगन है कि बाप-समान बनना ही है। 

• परन्तु, पुरुषार्थ करने के बाद भी वो powerful स्थिति नहीं बन रही है…!
• Light की dress में रहने का भी अभ्यास करते हैं 
• और बाप की छत्रछाया के नीचे रहने का भी अभ्यास करते हैं, परन्तु दोनों एक साथ नहीं कर पाते…!

बच्चे, शिवबाबा की नज़र हर पल आप बच्चों पर ही है … बाबा देख रहा है कि बच्चों के अंदर एक ही लगन है, परन्तु मगन होने में नम्बरवार है…!

यदि बच्चे आप अपना 100% दे पुरुषार्थ करते हो और आपके ऊपर अपना full attention है, तो बाप की guarantee है – बाप आपको अपने समान बना साथ ले जायेगा…।

यह अभ्यास नया होने के कारण आप बच्चों को थोड़ा मुश्किल लगता है … परन्तु जैसे-जैसे अभ्यास बढ़ाते जाओगे उतना ही सहज हो जायेगा और पहले से सहज हुआ भी है … और जब आप light house – might house स्थिति में स्थित होते हो, तो automatically आपका connection main power-house के साथ हो जाता है।

इसलिए, ज्यादा सोचो मत … ज्यादा सोचने पर दिलशिकस्त हो जाते हो।
वैसे भी हिसाब-किताब clear करने का समय होने के कारण स्थिति ऊपर-नीचे होती है।
आपका full attention होने के कारण, आप तुरन्त अपनी seat पर set हो जाते हो।
इसलिए, अपने पर निश्चय रखो … आप ही कल्प-कल्प के विजयी रत्न हो।

बस, मैं और मेरा-पन का त्याग कर, बाबा पर 100% निश्चय रख, हल्के हो आगे से आगे उड़ते चलो … ज्यादा सोचो मत – कैसे होगा, कब होगा, मैं कर पाऊँगा या नहीं…?

स्वयं से संतुष्ट रह, अर्थात अपने पुरूषार्थ से संतुष्ट रह, बीती को बिंदी लगा, बाप की याद की लगन में मगन रहो…।

बाबा हर पल आपके साथ है, अर्थात बाप भी आपको स्नेह, सहयोग और शक्ति दे रहा है … फिर तो हुआ ही पड़ा है ना…।

कोई हलचल नहीं, एकदम संतुष्ट, अचल, अडोल और एकरस रहना है…।

*अच्छा। ओम् शान्ति।*

*【 Peace Of Mind TV 】*

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आज की मुरली से कविता

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* मुरली कविता दिनांक 06-05-2019*

गृहस्थ व्यवहार में रहते स्वयं को ट्रस्टी बनाओ

पराई वस्तु समझकर सबसे आसक्ति मिटाओ

कुछ भी नहीं यहां हमारा मन को ये समझाओ

यहाँ की दुनिया में रहकर पूरे बैगर बन जाओ

अपने शरीर से जब तुम पूरा ममत्व मिटाओगे

परमधाम की मंजिल पर तब ही पहुंच पाओगे

इसी पुरुषार्थ से तुम बैगर से प्रिंस बन जाओगे

अमीरों की दुनिया में कोई भी गरीब ना पाओगे

दैवी गुण धारण करके औरों को धारण कराना

स्वदर्शन चक्रधारी बनकर औरों को भी बनाना

खुद को आत्मा समझकर बाप को याद करना

ऊंच पद पाने के लिए तुम यही पुरुषार्थ करना

बाप की अव्यभिचारी याद ही पावन बनाएगी

सुखधाम में जाने की यही विधि काम आएगी

बाप आकर अपने बच्चों को समझदार बनाते

जो बनते सम्पूर्ण पावन वो समझदार कहलाते

संगमयुग की स्मृति रख अतीन्द्रिय सुख पाओ

बाप से पढ़कर राजाओं का राजा बन जाओ

समझो इस ड्रामा के आदि मध्य अंत का ज्ञान

इसी ज्ञान से बन जाओगे बैगर से प्रिंस महान

रहमदिल बनकर क्षमा करके स्नेह देते जाओ

मास्टर दाता बन सबका कल्याण करते जाओ

निस्वार्थ स्नेह की सम्पत्ति सबको बांटते जाओ

ना जाए कोई खाली हाथ ये ध्यान रखते जाओ

तीव्र पुरुषार्थ करने की चाहना मन में जगाओ

राह भी मिल जाएगी तुम निरन्तर चलते जाओ

*ॐ शांति *

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