ईश्वरीय निमंत्रण पत्र (Godly Invitation)

ईश्वरीय निमंत्रण पत्र (Godly invitation and letter in Hindi). Come and know your eternal Father (god) and take your inheritance of Peace, purity, love and power from him through knowledge of Raja Yog (meditation to God, the Supreme Soul.)

जागो ! जागो ! हे विश्व की आत्माओं.. देवों के देव, सर्व आत्माओं के परमपिता, गीता का सच्चा भगवान जिन्हें शिव, अल्लाह, खुदा, जेवोहा, ओंकार, वाहेगुरु इत्यादि अनेक नामों से पुकारते हैं भारत की पावन भूमि पर अवतरित हो चुके हैं .

१) नयी सतयुगी स्वर्णिम दुनिया अथवा स्वर्ग की स्थापना करने जिससे विश्व की सभी मनुष्य आत्माएं इस पुरानी भ्रष्टाचारी, पतित, कलियुगी दुनिया के दुःख, पीड़ा, कष्टों से मुक्त हो सकें ।

२) सभी मनुष्यात्माओं को उनका आत्मिक परिचय देने लिए जो वास्तव में एक परमात्मा की संतान हैं  

३) सभी एक्टर्स रूपी आत्माओं को इस सृष्टि रूपी नाटक के अंत में उनके वास्तविक घर परमधाम लौटने का मार्ग बतलाने हेतु । 

शिवरात्रि परमात्मा का संगमयुग में अज्ञान अन्धकार रूपी रात्री (कलियुग अंत और सतयुग आदि ) में प्रजापिता ब्रह्मा के साधारण मनुष्य तन में दिव्य अवतरण का ही यादगार मनाया जाता है । इस ईश्वरीय निमंत्रण का उद्देश्य है परमात्मा के दिव्य अवतरण तथा वर्तमान के दृश्य प्रति सभी को जागरूक करना तथा बचे हुए शेष समय में परमात्मा से स्वर्ग में आधा कल्प के लिए पवित्रता, सुख, शांति का अपना ईश्वरीय जन्म सिद्ध अधिकार प्राप्त करने का अंतिम पुरुषार्थ करना ताकि यह उल्हाना ना हो कि हमें बताया नहीं गया और ना ही पश्चात्ताप करना पड़े कि हम ने भाग्य बनाने का सुनहरा अवसर खो दिया।

Before we begin,

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प्रति _______________ (आपका नाम )

प्रिय आत्मन,

दैवी भाई तथा बहनों, ईश्वरीय याद प्यार स्वीकार करना जी |

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आप को हार्दिक निमंत्रण है कि आप सहपरिवार यहाँ पधारकर सहज राजयोग की शिक्षा ग्रहण करें  | यह रूहानी शिक्षा कोई मनुष्य द्वारा दिया हुआ नहीं है बल्कि स्वयं निराकार ज्योतिर्बिंदुस्वरुप शिव परमात्मा एक साधारण मानव तन को निमित्त बनाकर १९३६ से अब तक दे रहे हैं | परमात्मा जिस मानव को आधार बनाते हैं उनका नाम पहले दादा लेखराज था जो कि एक बहुत बड़े हीरे जवाहरात के  व्यापारी थे जिनका नाम बदलकर भगवान शिव ने “प्रजापिता ब्रह्मा” रखा | फिर उनके द्वारा प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की स्थापना का कार्य संपन्न हुआ | इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय का लक्ष्य है भारत सहित पूरे विश्व को स्वर्ग बनाना और यह बनना ही है क्योंकि यह ईश्वरीय कार्य स्वयं परमात्मा प्रजापिता ब्रह्मा और जगदम्बा सरस्वती के माध्यम से करा रहे हैं | 

अतः आप आत्मिक भाइयों और बहनों से नम्र निवेदन है कि आप भी सह्परिवार इस ईश्वरीय विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण कर अवश्य अपना श्रेष्ठ भाग्य बनायें क्योंकि समय बहुत कम है और जल्द परिवर्तन होने वाला है | पुरानी कलियुगी दुनिया बदल नयी सतयुगी स्वर्णिम दुनिया का शीघ्र आगमन होने जा रहा है जहाँ पर प्राणियों सहित कोई भी मनुष्य आत्माओं को किसी भी प्रकार का दुःख, अशांति वा अप्राप्ति नहीं होगी , सदैव सुख शांति समृद्धि का राज्य होगा, सभी मानव देवता तुल्य होंगे, सोने हीरों के महल होंगे , प्रकृति सतोप्रधान होगी, प्रकृति के सभी पांचो तत्व सुखदायी होंगे, कोई भी विकार नहीं होंगे, एक राज्य और एक भाषा होगी, जहाँ नर श्री नारायण और नारी श्री लक्ष्मी समान होंगे | मानव से देवता बनने की पढ़ाई इस ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में वर्तमान समय चल रहा है | एक तरफ नयी दुनिया की स्थापना का कार्य चल रहा है तो दूसरी तरफ विज्ञान द्वारा पुरानी कलियुगी दुनिया के विनाश का कार्य भी चल रहा है |

कलियुगी दुनिया का विनाश तीन प्रकार से होगा
१) गृह युद्ध द्वारा
२) प्राकृतिक आपदाओं द्वारा और
३) परमाणु रासायनिक हथियारों द्वारा | 

कलियुगी दुनिया का महाविनाश अवश्यम्भावी होना ही है जिसका अंदाजा आप वर्तमान परिस्थितियों को देख लगा सकते हैं | अधिक जानकारी लिए visit page: World Transformation

आखिर में, आप महानुभावों को यही बताना चाहेंगे कि विनाश सामने खड़ा है जिसको ही शास्त्रों में महाभारत का समय कहा गया है | सर्वशास्त्रमई शिरोमणि श्रीमद भगवद गीता जिसमें भगवानुवाच शब्द का जिक्र आया है उसमें भी यही दिखाया है कि एक तरफ युद्ध के लिए कौरव तैयार हैं और दूसरी तरफ भगवान अर्जुन को सत्य ज्ञान सुना रहे हैं | वर्तमान समय वही गीता का प्रकरण पुनरावृत्त हो रहा है लेकिन अंतर यह है कि वर्तमान में वास्तविक गीता के भगवान परमात्मा निराकार शिव सच्चा गीता ज्ञान सभी मनुष्यात्माओं रूपी अर्जुन को अंतर बाह्य युद्ध जैसे माहोल में दे रहे हैं | एक तरफ साइंस द्वारा महाविनाश की तैयारी जोर शोर से चल रही है तो दूसरी तरफ परमपिता परमात्मा शिव प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा सत्य ज्ञान सुनाकर पतित मनुष्यात्माओं को देवात्मा बनाने का दिव्य कार्य कर रहे हैं |  

आप भी इस ईश्वरीय ज्ञान और सहज राजयोग की शिक्षा को अवश्य अपने जीवन में धारण कर परमात्मा शिव जो सभी आत्माओं के एकमेव परमपिता हैं , जिन्हें शिव, अल्लाह, खुदा, जेवोहा, ओंकार, वाहेगुरु इत्यादि नामों से विभिन्न धर्मों में जानते हैं के वरदानों के पात्र बनें और भविष्य में आने वाली दैवी दुनिया में २१ जन्मों का राज्य भाग्य अवश्य प्राप्त करें | 

ओम शांति l

* (Video) ईश्वरीय निमंत्रण ( Godly Invitation – Hindi )- BK Anil Kumar *

Article video in English (youtube)
https://www.youtube.com/watch?v=1XnbNrfAAO4

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