14 Feb 2019आज की मुरली से कविता (Today’s murli poem)

* मुरली कविता दिनांक 14.2.2019 *

परमपिता शिवबाबा आकर गीता ज्ञान सुनाते
बाप की याद में हम बच्चे शिव जयन्ती मनाते

​गीता ज्ञान सुनकर आत्माएं पवित्रता अपनाती
इसलिए शिव जयन्ती, गीता जयन्ती कहलाती

​धर्म स्थापना का आधार पवित्रता ही कहलाता
किंतू कोई भी धर्म स्थापक पावन नहीं बनाता

​केवल बाप का काम पतितों को पावन बनाना
इसीलिए बाप का होता इस संगमयुग में आना

​काम चिता पर जलकर भारत नर्क बन जाता
सतयुग में कभी ना रहता काम चिता से नाता

​ज्ञान अमृत धारा से सबको स्वर्गवासी बनाओ
मास्टर रहमदिल बनकर सबको देवता बनाओ

​ज्ञान की पराकाष्ठा से तुम बुद्धिमान बन जाओ
शिव जयन्ती की सच्चाई सिद्ध कर दिखलाओ

​बाप का स्नेह अपने दिल में धारण करते जाओ
आकर्षण से मुक्त होकर सच्चे स्नेही बन जाओ

​देह की दुनिया से सम्बन्धों से ऊपर उड़ जाओ
सुख से भरपूर इन्द्रप्रस्थ के निवासी बन जाओ

​*ॐ शांति*

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