11 Feb 2019आज की मुरली से कविता (Today’s murli poem)

* मुरली कविता दिनांक 11.2.2019 *

योग के जौहर से तीखी करो ज्ञान की तलवार
केवल इसी बल से विजय आएगी आपके द्वार

सारी दुनिया को देना खुदा का एक ही पैगाम
खुद को आत्मा समझकर छोड़ो देह अभिमान

बाप की याद से उतारो सिर से पाप का बोझ
पावन बनते जाओ करके याद बाप को रोज

बच्चों स्वयं को जितना अन्तर्मुखी बनाओगे
बाप का पैगाम तब ही दुनिया को दे पाओगे

ज्ञान के संग संग खुद में योग का बल बढ़ाना
केवल कुक्कड़ ज्ञानी ही खुद को नहीं बनाना

अपने जीवन को बिलकुल साधारण बनाओ
सबके संग रहते भी एक बाप से प्रीत लगाओ

पुरुषोत्तम संगमयुग पर ज्ञान सागर बाप आते
आकर हम सब बच्चों को ज्ञान की गंगा बनाते

भक्तिमार्ग का वादा बाप ही हमें याद दिलाते
सबको भूलाकर मुझसे प्रीत क्यों नहीं लगाते

मुझसे प्रीत रखने का तुमने ही किया था वादा
नहीं बदलना मुझसे प्रीत रखने का तुम इरादा

बाप को याद करने की बच्चों प्रेक्टिस बढ़ाओ
याद के जौहर से अपनी बुद्धि विशाल बनाओ

अपनी दृष्टि को जब तक पवित्र नहीं बनाओगे
ज्ञान योग में बच्चों कभी आगे ना बढ़ पाओगे

अन्तर्मुखी होकर खुद में याद का जौहर भरना
फरमान मानकर निरन्तर बाप को याद करना

एक बाप से अपने दिल में सच्ची प्रीत जगाना
देह और देह के सम्बन्धियों से ममत्व मिटाना

प्रवृति में सावधानी रखकर बनना होली हंस
क्रोध का मिटा देना जीवन से अंश और वंश

तीव्र पुरुषार्थ द्वारा हर बंधन पार करते जाओ
डबल लाइट स्थिति से मनोरंजन करते जाओ

यही अवस्था तुम्हें उड़ती कला में ले जाएगी
बोझ से मुक्त करके तुम्हें निर्बन्धन बनाएगी

ज्ञान गुण की बात को निज़ी संस्कार बनाओ
इसी विधि से खुद को तुम गुण मूरत बनाओ

*ॐ शांति*

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