23 Sep 2018 BK murli today in Hindi – Aaj ki Murli

Brahma Kumari murli today Hindi BapDada Madhuban 23-09-18 प्रात:मुरली ओम् शान्ति ”अव्यक्त-बापदादा” रिवाइज: 18-01-84 मधुबन

स्मृति दिवस का महत्व

आज मधुबन वाले बाप मधुबन में बच्चों से मिलने आये हैं। आज अमृतवेले से स्नेही बच्चों के स्नेह के गीत, समान बच्चों के मिलन मनाने के गीत, सम्पर्क में रहने वाले बच्चों के उमंग में आने के उत्साह भरे आवाज, बांधेली बच्चियों के स्नेह भरे मीठे उल्हनें, कई बच्चों के स्नेह के पुष्प बापदादा के पास पहुँचे। देश-विदेश के बच्चों के समर्थ संकल्पों की श्रेष्ठ प्रतिज्ञायें सभी बापदादा के पास समीप से पहुँची। बापदादा सभी बच्चों के स्नेह के संकल्प और समर्थ संकल्पों का रेसपान्ड कर रहे हैं। ”सदा बापदादा के स्नेही भव”। ”सदा समर्थ समान भव, सदा उमंग-उत्साह से समीप भव, लगन की अग्नि द्वारा बन्धनमुक्त स्वतंत्र आत्मा भव”। बच्चों के बन्धनमुक्त होने के दिन आये कि आये। बच्चों के स्नेह के दिल के आवाज, कुम्भकरण आत्माओं को अवश्य जगायेंगे। यही बन्धन में डालने वाले स्वयं प्रभु स्नेह के बन्धन में बंध जायेंगे। बापदादा विशेष बन्धन वाली बच्चियों को शुभ दिन आने की दिल का आथत दे रहे हैं क्योंकि आज के विशेष दिन पर विशेष स्नेह के मोती बापदादा के पास पहुँचते हैं। यही स्नेह के मोती श्रेष्ठ हीरा बना देते हैं। आज का दिन समर्थ दिन है। आज का दिन समान बच्चों को ततत्वम् के वरदान का दिन है। आज के दिन बापदादा शक्ति सेना को सर्व शक्तियों की विल करता है, विल पावर देते हैं। विल की पावर देते हैं। आज का दिन बाप का बैक-बोन बन बच्चों को विश्व के मैदान में आगे रखने का दिन है। बाप अन-नोन है और बच्चे वेलनोन हैं। आज का दिन ब्रह्मा बाप के कर्मातीत होने का दिन है। तीव्रगति से विश्व कल्याण, विश्व परिक्रमा का कार्य आरम्भ होने का दिन है। आज का दिन बच्चों के दर्पण द्वारा बापदादा के प्रख्यात होने का दिन है। जगत के बच्चों को जगत पिता का परिचय देने का दिन है। सर्व बच्चों को अपनी स्थिति, ज्ञान स्तम्भ, शक्ति स्तम्भ अर्थात् स्तम्भ के समान अचल अडोल बनने की प्रेरणा देने का दिन है। हर बच्चा बाप का यादगार शान्ति स्तम्भ है। यह तो स्थूल शान्ति स्तम्भ बनाया है। परन्तु बाप की याद में रहने वाले याद का स्तम्भ आप चैतन्य सभी बच्चे हो। बापदादा सभी चैतन्य स्तम्भ बच्चों की परिक्रमा लगाते हैं। जैसे आज शान्ति स्तम्भ पर खड़े होते हो, बापदादा आप सभी याद में रहने वाले स्तम्भों के आगे खड़े होते हैं। आप आज के दिन विशेष बाप के कमरे में जाते हो। बापदादा भी हर बच्चे के दिल के कमरे में बच्चों से दिल की बातें करते हैं और आप झोपड़ी में जाते हो। झोपड़ी है दिलवर और दिलरूबा की यादगार। दिलरूबा बच्चों से दिलवर बाप विशेष मिलन मनाते हैं। तो बापदादा भी सभी दिलरूबा बच्चों के भिन्न-भिन्न साज़ सुनते रहते हैं। कोई स्नेह की ताल से साज़ बजाते, कोई शक्ति की ताल से, कोई आनन्द, कोई प्रेम की ताल से। भिन्न-भिन्न ताल के साज़ सुनते रहते हैं। बापदादा भी आप सभी के साथ-साथ चक्र लगाते रहते हैं। तो आज के दिन का विशेष महत्व समझा!आज का दिन सिर्फ स्मृति का दिन नहीं लेकिन स्मृति सो समर्थी दिवस है। आज का दिन वियोग वा वैराग्य का दिन नहीं है लेकिन सेवा की जिम्मेवारी के ताजपोशी का दिन है। समर्थी के स्मृति के तिलक का दिन है। ”आगे बच्चे पीछे बाप” इसी संकल्प को साकार होने का दिन है। आज के दिन ब्रह्मा बाप विशेष डबल विदेशी बच्चों को बाप के संकल्प और आह्वान को साकार रूप देने वाले स्नेही बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। कैसे स्नेह द्वारा बाप के सम्मुख पहुँच गये हैं। ब्रह्मा बाप के आह्वान के प्रत्यक्ष फल स्वरूप, ऐसे सर्व शक्तियों के रस भरे श्रेष्ठ फलों को देख ब्रह्मा बाप बच्चों को विशेष बधाई और वरदान दे रहे हैं। सदा सहज विधि द्वारा वृद्धि को पाते रहो। जैसे बच्चे हर कदम में ”बाप की कमाल है” यही गीत गाते हैं, ऐसे बापदादा भी यही कहते हैं कि बच्चों की कमाल है। दूरदेशी, दूर के धर्म वाले होते भी कितने समीप हो गये हैं। समीप आबू में रहने वाले दूर हो गये हैं। सागर के तट पर रहने वाले प्यासे रह गये हैं लेकिन डबल विदेशी बच्चे औरों की भी प्यास बुझाने वाले ज्ञान गंगायें बन गये। कमाल है ना बच्चों की इसलिए ऐसे खुशनशीब बच्चों पर बापदादा सदा खुश हैं। आप सभी भी डबल खुश हो ना। अच्छा-ऐसे सदा समान बनने के श्रेष्ठ संकल्पधारी, सर्व शक्तियों के विल द्वारा विल पावर में रहने वाले, सदा दिलवर की दिलरूबा बन भिन्न-भिन्न साज़ सुनाने वाले सदा स्तम्भ के समान अचल-अडोल रहने वाले, सदा सहज विधि द्वारा वृद्धि को पाए वृद्धि को प्राप्त कराने वाले, सदा मुधर मिलन मनाने वाले देश-विदेश के सर्व प्रकार के वैरायटी बच्चों को पुष्प वर्षा सहित बापदादा का याद-प्यार और नमस्ते।आज सभी स्नेही विशेष सेवाधारी बच्चों को वतन में बुलाया था। जगत अम्बा को भी बुलाया, दीदी को भी बुलाया। विश्व किशोर आदि जो भी अनन्य गये हैं सेवा अर्थ, उन सबको वतन में बुलाया था। विशेष स्मृति दिवस मनाने के लिए सभी अनन्य डबल सेवा के निमित्त बने हुए बच्चे संगम के ईश्वरीय सेवा में भी साथी हैं और भविष्य राज्य दिलाने की सेवा के भी साथी हैं। तो डबल सेवाधारी हो गये ना। ऐसे डबल सेवाधारी बच्चों ने विशेष रूप से सभी मधुबन में आये हुए सहयोगी स्नेही आत्माओं को यादप्यार दी है। आज बापदादा उन्हों की तरफ से याद-प्यार का सन्देश दे रहे हैं। समझा। कोई किसको याद करते, कोई किसको याद करते। बाप के साथ-साथ सेवार्थ एडवांस पुरुषार्थी बच्चों को जिन्होंने भी संकल्प में याद किया उन सभी की याद का रिटर्न सभी ने यादप्यार दिया है। पुष्पशान्ता भी स्नेह से याद करती थी। ऐसे तो नाम कितने का लेंवे। सभी की विशेष पार्टी वतन में थी। डबल विदेशियों के लिए विशेष दीदी ने याद दी है। आज दीदी को विशेष बहुतों ने याद किया ना क्योंकि इन्होंने दीदी को ही देखा है। जगत अम्बा और भाऊ (विश्व किशोर) को तो देखा नहीं इसलिए दीदी की याद विशेष आई। वह लास्ट टाइम बिल्कुल निरसंकल्प और निर्मोही थी। उनको भी याद तो आती है लेकिन वह खींच की याद नहीं है। स्वतंत्र आत्मा है। उन्हों का भी संगठन शक्तिशाली बन रहा है। सब नामीग्रामी है ना। अच्छा-कुछ विदेशी भाई-बहन सेवा पर जाने के लिए बापदादा से छुट्टी ले रहे हैं:सभी बच्चों को बापदादा यही कहते हैं कि जा नहीं रहे हो लेकिन फिर से आने के लिए, फिर से बाप के आगे सेवा कर गुलदस्ता लाने के लिए जा रहे हो इसलिए घर नहीं जा रहे हो, सेवा पर जा रहे हो। घर नहीं सेवा का स्थान है, यही सदा याद रहे। रहमदिल बाप के बच्चे हो तो दु:खी आत्माओं का भी कल्याण करो। सेवा के बिना चैन से सो नहीं सकते। स्वप्न भी सेवा के आते हैं ना। आंख खुली बाबा से मिले फिर सारा दिन बाप और सेवा। देखो, बापदादा को कितना नाज़ है कि एक बच्चा सर्विसएबुल नहीं लेकिन इतने सब सर्विसएबुल हैं। एक-एक बच्चा विश्व कल्याणकारी है। अभी देखेंगे कौन बड़ा गुलदस्ता लाता है। तो जा रहे हैं या फिर से आ रहे हैं! तो ज्यादा स्नेह किसका हुआ? बाप का या आपका? अगर बच्चों का स्नेह ज्यादा रहे तो बच्चे सेफ हैं। महादानी, वरदानी, सम्पन्न आत्मायें जा रहे हैं, अभी अनेक आत्माओं को धनवान बनाकर, सजाकर बाप के सामने ले आना। जा नहीं रहे हो लेकिन सेवा कर एक से तीन गुना होकर आयेंगे। शरीर से भल कितना भी दूर जा रहे हो लेकिन आत्मा सदा बाप के साथ है। बापदादा सहयोगी बच्चों को सदा ही साथ देखते हैं। सहयोगी बच्चों को सदा ही सहयोग प्राप्त होता है। अच्छा।डबल विदेशी भाई बहिनों के प्रश्न-बापदादा के उत्तरप्रश्न:- कई ब्राह्मण आत्माओं पर भी ईविल सोल्स का प्रभाव पड़ जाता है, उस समय क्या करना चाहिए?उत्तर:- इसके लिए सेवाकेन्द्र का वातावरण बहुत शक्तिशाली सदा रहना चाहिए और साथ में अपना भी वातावरण शक्तिशाली रहे। फिर यह ईविल प्रिट कुछ नहीं कर सकती है। यह मन को पकड़ती हैं। मन की शक्ति कमजोर होने के कारण ही इसका प्रभाव पड़ जाता है। तो शुरू से पहले ही उसके प्रति ऐसे योगयुक्त आत्मायें विशेष योग भट्ठी रख करके उसको शक्ति दें और वह जो योगयुक्त ग्रुप है वह समझे कि हमको यह विशेष कार्य करना है, जैसे और प्रोग्राम होते हैं वैसे यह प्रोग्राम इतना अटेन्शन से करें तो फिर शुरू में उस आत्मा को ताकत मिलने से बच सकती हैं। भले वह आत्मा परवश होने के कारण योग में नहीं भी बैठ सके, क्योंकि उसके ऊपर दूसरे का प्रभाव होता है, तो वह भले ही न बैठे लेकिन आप अपना कार्य निश्चय बुद्धि हो करके करते रहो। तो धीरे-धीरे उसकी चंचलता शान्त होती जायेगी। वह ईविल आत्मा पहले आप लोगों के ऊपर भी वार करने की कोशिश करेगी लेकिन आप समझो यह कार्य करना ही है, डरो नहीं तो धीरे-धीरे उसका प्रभाव हट जायेगा।प्रश्न:- सेवाकेन्द्र पर अगर कोई प्रवेशता वाली आत्मायें ज्ञान सुनने के लिए आती हैं तो क्या करना चाहिए?उत्तर:- अगर ज्ञान सुनने से उसमें थोड़ा-सा भी अन्तर आता है या सेकण्ड के लिए भी अनुभव करती है तो उसको उल्लास में लाना चाहिए। कई बार आत्मायें थोड़ा-सा ठिकाना ना मिलने के कारण भी आपके पास आती हैं, बदलने के लिए आया है या वैसे ही पागलपन में जहाँ रास्ता मिला, आ गया है वह परखना चाहिए क्योंकि कई बार ऐसे पागल होते हैं जो जहाँ भी देखेंगे दरवाजा खुला है वहाँ जायेंगे। होश में नहीं होते हैं। तो ऐसे कई आयेंगे लेकिन उसको पहले परखना है। नहीं तो उसमें टाइम वेस्ट हो जायेगा। बाकी कोई अच्छे लक्ष्य से आया है, परवश है तो उसको शक्ति देना अपना काम है। लेकिन ऐसी आत्माओं को कभी भी अकेले में अटेण्ड नहीं करना। कुमारी कोई ऐसी आत्मा को अकेले में अटेण्ड न करें क्योंकि कुमारी को अकेला देख पागल का पागलपन और निकलता है इसलिए ऐसी आत्मायें अगर समझते हो योग्य हैं, तो उन्हें ऐसा टाइम दो जिस टाइम दो-तीन और हों या कोई जिम्मेवार, कोई बुजुर्ग ऐसा हो तो उस समय उसको बुलाकर बिठाना चाहिए क्योंकि जमाना बहुत गन्दा है और बहुत बुरे संकल्प वाले लोग हैं इसलिए थोड़ा अटेन्शन रखना भी जरूरी है। इसमें बहुत क्लियर बुद्धि चाहिए। क्लियर बुद्धि होगी तो हरेक के वायब्रेशन से कैच कर सकेंगे कि यह किस एम से आया है।प्रश्न:- आजकल किसी-किसी स्थान पर चोरी और भय का वातावरण बहुत है, उनसे कैसे बचे?उत्तर:- इसमें योग की शक्ति बहुत चाहिए। मान लो कोई आपको डराने के ख्याल से आता है तो उस समय योग की शक्ति दो। अगर थोड़ा कुछ बोलेंगी तो नुकसान हो जायेगा इसलिए ऐसे समय पर शान्ति की शक्ति दो। उस समय पर अगर थोड़ा भी कुछ कहा तो उन्हों में जैसे अग्नि में तेल डाला। आप ऐसे रीति से रहो जैसे बेपरवाह हैं, हमको कोई परवाह नहीं है। जो करता है उसको साक्षी होकर अन्दर शान्ति की शक्ति दो तो फिर उसके हाथ नहीं चलेंगे। वह समझेंगे इनको तो कोई परवाह नहीं है। नहीं तो डराते हैं, डर गये या हलचल में आये तो वह और ही हलचल में लाते हैं। भय भी उन्हों को हिम्मत दिलाता है इसलिए भय में नहीं आना चाहिए। ऐसे टाइम पर साक्षीदृष्टा की स्थिति यूज़ करनी है। अभ्यास चाहिए ऐसे टाइम।

प्रश्न:- ब्लैसिंग जो बापदादा द्वारा मिलती है, उसका गलत प्रयोग क्या है?

उत्तर:- कभी-कभी जैसे बापदादा बच्चों को सर्विसएबल या अनन्य कहते हैं या को0ई विशेष टाइटल देते हैं तो उस टाइटल को मिसयूज कर लेते हैं, समझते हैं मैं तो ऐसा बन ही गया। मैं तो हूँ ही ऐसा। ऐसा समझकर अपना आगे का पुरुषार्थ छोड़ देते हैं, इसको कहते हैं मिसयूज़ अर्थात् गलत प्रयोग क्योंकि बापदादा जो वरदान देते हैं, उस वरदान को स्वयं के प्रति और सेवा के प्रति लगाना, यह है सही रीति से यूज़ करना और अलबेला बन जाना, यह है मिसयूज़ करना।

प्रश्न:- बाइबिल में दिखाते हैं, अन्तिम समय में एन्टी क्राइस्ट का रूप होगा, इसका रहस्य क्या है?

उत्तर:- एन्टी क्राइस्ट का अर्थ है उस धर्म के प्रभाव को कम करने वाले। आजकल देखो उसी क्रिश्चियन धर्म में क्रिश्चियन धर्म की वैल्यू को कम समझते जा रहे हैं, उसी धर्म वाले अपने धर्म को इतना शक्तिशाली नहीं समझते और दूसरों में शक्ति ज्यादा अनुभव करते हैं, यही एन्टी क्राइस्ट हो गये। जैसे आजकल के कई पादरी ब्रह्मचर्य को महत्व नहीं देते और उन्हों को गृहस्थी बनाने की प्रेरणा देने शुरू कर दी है तो यह उसी धर्म वाले जैसे एन्टी क्राइस्ट हुए। अच्छा!

वरदान:- बाप के राइट हैण्ड बन हर कार्य में सदा एवररेडी रहने वाले मास्टर भाग्य विधाता भव

जो बच्चे राइट हैण्ड बन बाप के हर कार्य में सदा सहयोगी, सदा एवररेडी रहते हैं, आज्ञाकारी बन सदा कहते हाँ बाबा हम तैयार हैं। बाप भी ऐसे सहयोगी बच्चों को सदा मुरब्बी बच्चे, सपूत बच्चे, विश्व के श्रृंगार बच्चे कह मास्टर वरदाता और भाग्य विधाता का वरदान दे देते हैं। ऐसे बच्चे प्रवृत्ति में रहते भी प्रवृत्ति की वृत्ति से परे रहते हैं, व्यवहार में रहते अलौकिक व्यवहार का सदा ध्यान रखते हैं।

स्लोगन:- हर बोल और कर्म में सच्चाई सफाई हो तो प्रभू के प्रिय रत्न बन जायेंगे।

Comments are closed.

Create a website or blog at WordPress.com

Up ↑

%d bloggers like this: