8 May Essence of Murli today in Hindi

Brahma Kumaris essence of murli today in Hindi for 8 May 2018 – BapDada – Madhuban –

“मीठे बच्चे – यह ज्ञान बड़े मजे का है, तुम हरेक अपने लिए कमाई करते हो। तुम्हें और किसी का भी ख्याल नहीं करना है, अपनी इस देह को भी भूल कमाई में लग जाना है।”

Q- अविनाशी कमाई करने की विधि क्या है? इस कमाई से वंचित कौन रह जाता है?

A- यह अविनाशी कमाई करने के लिए रात को वा अमृतवेले जागकर बाप को याद करते रहो, विचार सागर मंथन करो। कमाई में कभी उबासी या नींद नहीं आती। तुम चलते-फिरते भी बाप की याद में रहो तो हर सेकेण्ड कमाई है। तुम्हें इन्डिपेन्डेंट अपने लिए कमाई करनी है। जो उस विनाशी कमाई के लोभ में ज्यादा जाते, वह इस कमाई से वंचित हो जाते हैं।

D- 1) स्थाई खुशी में रहने के लिए विचार सागर मंथन करना है। नशे में रहना है कि हम ब्रह्माण्ड और विश्व के मालिक बनने वाले हैं।—–2) एक बाप से सच्ची प्रीत रख कमाई करनी है। हम आत्मा इस देह में रथी हैं। रथी समझ देही-अभिमानी बनने का अभ्यास करना है।

V- बाप के डायरेक्शन प्रमाण सेवा समझ हर कार्य करने वाले सदा अथक और बन्धनमुक्त भव—–प्रवृत्ति को सेवा समझकर सम्भालो, बंधन समझकर नहीं। बाप ने डायरेक्शन दिया है – योग से हिसाब-किताब चुक्तू करो। यह तो मालूम है कि वह बंधन है लेकिन घड़ी-घड़ी कहने वा सोचने से और भी कड़ा बंधन हो जाता है और अन्त घड़ी में अगर बंधन ही याद रहा तो गर्भ-जेल में जाना पड़ेगा इसलिए कभी भी अपने से तंग नहीं हो। फंसो भी नहीं और मजबूर भी न हो, खेल-खेल में हर कार्य करते चलो तो अथक भी रहेंगे और बंधनमुक्त भी बनते जायेंगे।

S- भ्रकुटी की कुटिया में बैठकर तपस्वीमूर्त होकर रहो – यही अन्तर्मुखता है।

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